Communist League of India

लाल सलाम

लाल सलाम के विभिन्न अंकों में प्रकाशित सामग्री

अंक 44 जनवरी 2022

  1. नारी मुक्ति और नारीवाद
  2. भारत-चीन सीमा विवाद
  3. यूरोपीय संघ: वर्तमान स्थिति
  4. बदलती दुनिया में वैश्विक गठबंधन
  5. सफल ऐतिहासिक किसान आंदोलन: एक टिप्पणी

अंक 43 जुलाई 2021

श्रंद्धांजलि

1. कामरेड नामनाथ
1. कामरेड नामनाथ
3. कामरेड लाल भारती

नवे पार्टी सम्मेलन के दस्तावेज

क. राजनीतिक रिपोर्ट
1. अंतराष्ट्रीय परिस्थिति
2. राष्ट्रीय परिस्थिति

नवे पार्टी सम्मेलन के दस्तावेज

ख. प्रस्ताव
1. शहीदों का श्रद्वांजलि
2. भारत के कम्युनिष्ट आंदोलन के सौ साल
3. हिन्दु फासीवाद के बढ़ते खतरे के खिलाफ एकजुट हो !
4. कोविड-19 महामारी के बारे में
5. विश्व स्तर पर फूट रहे जनांदोलनों के विरोध में
6. एनआरसी, सीएए व एनपीआर के विरोध में
7. कश्मीर पर बोले गये फासीवादी हमले के खिलाफ

ग. अल्प संख्यकों के बारे में कार्यनीति

अंक 42 जनवरी 2021

1. रोजा लग्जमबर्ग

2. नई श्रम संहिताएं: पूंजी द्वारा श्रम पर एक और कुठाराघात

3. कृषि कानून और किसान संघर्ष

4. हिंदू पफासीवादी परियोजना के खिलापफ पफूटे लोकप्रिय जनांदोलन
के कुछ निष्कर्ष

5. कोविड-19 महामारी और दुनिया


अंक 41 जुलाई 2020

1. फ्रैडरिक एंगेल्स: महान सर्वहारा चिंतक और शिक्षक

2.पेरिस कम्यून: स्वर्ग पर धावा

3. पेरिस कम्यून का विचारधारात्मक अवदान

4. हमारे युग में पेरिस कम्यून का अवदान

5. फासीवाद: वर्तमान खतरा और हमारे कार्यभार
6. Fascism : Present danger and our tasks

अंक 40 जुलाई 2020

1. भारतीय और चीनी दर्शन में द्वंद्ववाद

2. श्रम कानून और वर्ग संघर्ष

3. इटली का ट्रेड यूनियन आंदोलन

4. भारत और वैश्वििक अर्थव्यवस्था का संकट

5. भारत में सेवा क्षेत्र

6. एल जी बी टी समस्या

अंक 39 जुलाई 2019

1. गति और परिवर्तन: दर्शन और विज्ञान

2. ट्रेड यूनियनें और क्रांति

जर्मनी का ट्रेड यूनियन आंदोलन

3. पर्यावरणवाद और मार्क्सवाद

4. लातिन अमेरिकी ‘वामपंथी’ सरकारें: एक विश्लेषण

5. श्रम कानून और वर्ग संघर्ष

अंक 38 जनवरी 2019

1. प्रगति की धारणा और मार्क्सवाद

2. जर्मनी का ट्रेड यूनियन आंदोलन

3. भारतीय कृषि और उसका संकट: ताजा तस्वीर

4. आज का दलित आंदोलन

अंक 37 जुलाई 2018विज्ञान, दर्शन और विचारधारा (संदर्भ: जीव विज्ञान)

1. विज्ञान, दर्शन और विचारधरा (संदर्भ: जीव विज्ञान)

2. ट्रेड यूनियनें और क्रांति – फ़्रांस का ट्रेड यूनियन आंदोलन

3. घोर दक्षिणपंथी एवं नव फासीवादी उभार

4. पश्चिम एशिया: साम्राज्यवादी हस्तक्षेप और युद्धों का अटूट सिलसिला

अंक 36 जनवरी 2018

1. कार्ल मार्क्स के दो सौ साल

2. मार्क्स और मार्क्सवाद

3. मार्क्स के बाद मार्क्सवाद

4. मार्क्सवाद और संशोधनवाद

5. मार्क्सवाद और बुर्जुआ वर्ग

अंक 35 जुलाई 2017

1. नक्सलबाड़ी के 50 साल और आज की चुनौतियां

2. उदार बुर्जुआ जनतंत्रा और साम्यवाद

3. क्रांतियों में हिंसा और आतंक का सवाल

4. क्रांतियां और बुर्जुआ वर्गं

5. सर्वहारा की तानाशाही

6. पूंजीवादी विकास बनाम समाजवादी विकास

7. फासीवाद और सोवियत समाजवाद

अंक 34 जनवरी 2017

1. सोवियत समाजवाद: एक प्रति आलोचना

2. स्तालिन: महान सर्वहारा शिक्षक व नेता

3. सोवियत संघ में पूंजीवादी पुनर्स्थापना

4. सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी व विश्व कम्युनिस्ट आंदोलन

अंक 33 जुलाई 2016

1. महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति

2. अक्टूबर क्रांति और बोल्शेविकों की कार्यनीति

3. सोवियत संघ में समाजवाद का निर्माण

4. सोवियत संघ में पूंजीवाद की पुनर्स्थापना

5. अक्टूबर क्रांति का अंतर्राष्ट्रीय महत्व

अंक 32 जनवरी 2016

1. नेपाल में नया संविधान

2. पूंजीवाद में गैर बराबरी का राजनीतिक अर्थशास्त्र

3. अम्बेडकरवाद और कम्युनिस्ट क्रांतिकारी आंदोलन

4. ग्रीस संकट

अंक.31  जुलाई 2015

1. भूमिका

2. राजनीतिक प्रस्ताव

3. सांगठनिक रिपोर्ट (अंश)

4. प्रस्ताव

अंक 30 जनवरी 2015
1 निषेध का निषेध पर कुछ और
2. मोदी के छः माह और हिन्दू फासीवाद

3. ट्रेड यूनियनें और क्रांति

4. इराक-सीरिया व इस्लामिक स्टेट
5 वैश्विक आर्थिक हालात: एक टिप्पणी
6 ‘भारतीय क्रांति और इसकी समस्याएं’ – एक टिप्पणी

7. क्रांतिकारी कम्युनिस्ट लीग, भारत के बारे में

8. MORE ON NEGATION OF THE NEGATION

अंक .29 जुलाई 2014

1. का. सुनीति कुमार घोष को लाल सलाम

2. निषेध का निषेध एक परम्परागत प्रस्तुति

3. सं.रा. अमेरिका में ट्रेड यूनियन आंदोलन

4. पूर्वी यूरोप और साम्राज्यवाद

5. आम चुनाव 2014

6. NEGATION OF NEGATION : AN ORTHODOX  OVERVIEW

अंक 28 जनवरी 2014

1. दिशा संधान के बहाने दिशा भ्रम की पुरजोर कोशिश

2. कहां से शुरू न करें !

3. मिश्र का जनविद्रोह

4. भारतीय अर्थव्यवस्था का संकट

5. टिप्पणियां

अंक 27 जुलाई 2013

1. बाब अवाकिएन का ‘नव संश्लेषण’: गम्भीर संशोधनवादी भटकाव

2. ब्रिटेन का ट्रेड यूनियन आंदोलन और सर्वहारा क्रांतिµकुछ सबक3.

3. विश्व आर्थिक संकट: सूरते हाल 2013

4. वैश्विक विरोध प्रदर्शनों में मुखर प्रवृत्तियां और उनकी गति

5. फासीवादी मोदी का ‘विकास’ माॅडल और भारतीय पूंजीपति वर्ग

अंक 26 जनवरी 2012

1. मजदूर वर्ग और  उसकी पार्टी  

2. अफ्रीका और साम्राज्यवाद

3. आटो सेक्टर और मजदूर वर्ग

अंक 25 जुलाई 2012

1. नेपाली क्रांति नये मोड़ पर

2. ट्रेड यूनियनें और सर्वहारा क्रांति

3. जाति जमीन जनवाद के बारे में

4. भारत के आर्थिक विकास का राजनीतिक अर्थशास्त्र

5. हालिया जन संघर्ष और गैर सरकारी संगठन

अंक.24 जनवरी 2012

1. चारू मजूमदार की विचारधरात्मक, राजनैतिक व सांगठनिक लाइन: एक आलोचना

2. कृषि संकट: कुछ आयाम

3. असंगठित क्षेत्र में मजदूर वर्ग

4. साल 2011 के विद्रोह और विरोध प्रदर्शन

5. अन्ना परिघटना

6. पश्चिम बंगाल: माकपा नीत ‘वाम मोर्चे’ की हार

अंक 23 जुलाई 2011

1. ट्रेड यूनियनें और सर्वहारा क्रांति

2. विश्व आर्थिक संकट: वर्तमान स्थिति

3. अरब जगत में जन विद्रोह

4. मध्य-पूर्व भारत पूंजी की आखेटक भूमि

5. पुस्तक समीक्षा

अंक 22 जनवरी 2011

1. माओ विचारधरा

2. फुटलूज क्रांतिकारियों के फुटलूज सिद्धान्त

3. कश्मीरी राष्ट्रीयता का सवाल

4. भारत की संसदीय व्यवस्था: एक टिप्पणी

5. पुस्तक समीक्षा: माओवाद पर दो पुस्तकें

अंक .21 जुलाई 2010

1. भूमिका

2. राजनीतिक रिपोर्ट

3. हमारी समस्याएं और समाधन (सिद्धांत और उसके प्रति रुख का सवाल, राजनीति में मार्क्सवादी अवस्थितियों से विच्युति, सांगठनिक सवालों पर विच्युति,
कुछ अन्य मुद्दे )

अंक 20 जनवरी 2010

1. यूरो कम्युनिज्म अतीत के संशोध्नवाद की एक नयी किस्म

2. जनवादी क्रांति के अधूरे छूूटे कार्यभार और समाजवादी क्रांति (दूसरी किस्त)

3. विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की बनावट

अंक 19 जुलाई 2009

1. का. हरभजन सिंह सोही को लाल सलाम

2. जनवादी क्रांति के अधूरे छूटे कार्यभार और समाजवादी क्रांति (पहली किस्त) सैद्धान्तिक विवेचना

3. पूंजीवाद बचाओ मोर्चा नयी संशोध्नवादी पहल

4. उदारीकरण के दौर का भारतीय पूंजीवाद

5. विश्व खाद्यान्न संकट

6. नेपाल: क्रांति का सपफर जारी है

7. श्रीलंका: लिट्टे का सफाया तमिल आत्म निर्णय की ज्वाला को और धधकायेगा

अंक 18 जनवरी .2009

1. यूगोस्लाविया: संशोधनवाद के सबक

2. व्यक्तिवाद और व्यक्ति की भूमिका के बारे में कुछ सैद्धान्तिक बातें

3. विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का संकट

4. भारतीय मध्यम वर्ग

अंक 17 जुलाई 2008

1. सगरमाथा पर लहराते लाल परचम को लाल सलाम

2. मार्क्सवाद जिंदाबाद ! संशोधनवाद मुर्दाबाद !!

3. व्यक्तिवाद और हमारे देश का क्रांतिकारी आंदोलन

4. छोटे किसानों का सवाल: विभ्रम और यथार्थ

5. वियतनाम: राष्ट्रीय मुक्ति क्रांति से पूंजीवाद तक

6. समय की मांग: सही दिशा में कुछ कदम और

7. भाकपा (माले) लिबरेशन का आठवां महाधिवेशन: संक्षिप्त टिप्पणी

8. राज्य द्वारा कम्युनिस्ट क्रांतिकारी आंदोलन के दमन का विरोध करो !

अंक 16 जनवरी 2008

1. अनवर होजा का मार्क्सवाद: एक मूल्यांकन

2. लातिन अमरीका में ‘वामपंथी’ उभार

3. विशेष आर्थिक क्षेत्रा और उनसे जुड़े सवाल

4. भा.क.पा. (माओवादी) की एकता कांग्रेस (एक आलोचना)

5. एक बहस में अयाचित हस्तक्षेप

अंक 15 जुलाई 2007

1. प्रस्तावना

2. राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय परिस्थितियों का मूल्यांकन

3. कार्यक्रम (मसविदा)

4. रणकौशलात्मक दिशा

5. पार्टी संविधन

6. हमारे पार्टी संगठन के इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण सबक

7. सांगठनिक रिपोर्ट (अंश)

8. राजनीतिक प्रस्ताव

अंक 14 जनवरी 2007

1. क्रांति में आत्मगत शक्तियों की भूमिका

2. क्रांतिकारी जनदिशा

3. चीन में महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति (1966-1976)

4. उत्तरी कोरिया, क्रांतियां और पूंजीवादी पुनर्स्थापना

5. साम्राज्यवादी विचारधराओं का दिवालियापन

6. सी.पी.आई. (एम.एल.) न्यू डेमोक्रेसी: संक्षिप्त आलोचना

अंक 13 जुलाई 2006

1. नेपाली क्रांति जिन्दाबाद

2. पूंजीवादी विकास, संकट, विश्वयुद्ध और क्रांतियां

3. क्यूबा: अतीत, वर्तमान और भविष्य

4. नवोदित धर्मिक संस्थाएं: मार्क्सवादी दृष्टिकोण

5. पूंजीवादी पुनस्र्थापना के बाद चीन

6. भारत के शेयर बाजार

अंक 12 जनवरी 2006

1. ट्राटस्कीवाद: एक निम्न बुर्जुआ क्रांति विरोधी विचारधारा

2. भारत में नारी मुक्ति का प्रश्न

3. मुस्लिम आतंकवाद और अमरीकी साम्राज्यवाद

4. वामपंथी बड़बड़ियों की गड़बड़ियां

5. वाम दुस्साहसवादी कार्यवाही पर एक टिप्पणी

अंक 11 जुलाई 2005

1. विचारधरा के बारे में

2. साम्राज्यवाद के प्रश्न पर कुछ गलत प्रवृत्तियां

3. भारत की राजनीतिक व्यवस्था

4. अफ्रीकी राष्ट्रीय मुक्ति युद्ध और निम्न पूंजीपति वर्ग की भूमिका

5. CPI(ML) और CPI(ML) रेड फ्लैग के एकता सम्मेलन के दस्तावेज: एक आलोचना

अंक 10 जनवरी 2005

1. क्रांति के बारे में कुछ टिप्पणियां

2. भारत में राष्ट्रीयता के सवाल पर चन्द बातें

3. भारतीय कृषि क्रांति के कुछ प्रश्न

4. वर्तमान कृषि संकट

5. नये इंटरनेशनल के गठन का सवाल और रिम

6. एक कम्युनिस्ट संगठन से आध्यात्मिक मठ की ओर

अंक 9 जुलाई 2004

1. पार्टी का गठन

2. क्रांतिकारी परिस्थितियों के बारे में

3. भारत के कम्युनिस्ट क्रातिकारी आंदोलन में सुधारवादी प्रवृत्तियां

4. नेकपा (माओवादी) एक आलोचना

5. संसदीय चुनावों में हमारी कार्यनीति

6. ‘फार ए प्रोलेतारियन पार्टी’ के सम्पादक मण्डल के कृषि प्रश्न के बारे में प्रस्ताव पर हमारा पत्र

अंक 8 जनवरी 2004

1. भारतीय फासीवाद

2. जाति प्रश्न के बारे में

3. सशस्त्र संघर्ष

4. 15 फरवरी 2003 के निहितार्थ

5. CPRCI(ML)की विसंगतिपूर्ण अवस्थितियां-एक आलोचना

6. भारतीय क्रांति के सांचोपांजा

7. एकता के प्रयास

अंक 7 जुलाई 2003

1. अभिजात मजदूर वर्ग के बारे में

2. इक्कीसवीं सदी और राष्ट्रीय सवाल

3. छोटे किसान का सवाल-एक सही दृष्टिकोण

4. साम्राज्यवाद और इराक

5. पुस्तक समीक्षा: ‘वैश्वीकरण: भारत की सम्प्रभुता पर हमला’

अंक 6 जनवरी 2003

1. मजदूर हड़तालों का सिलसिला: चुनौतियाँ और सम्भावनायें

2. दलाल और राष्ट्रीय बुर्जुआ के बारे में

3. भारतीय पूंजीपति वर्ग के चरित्र के बारे में

4. उत्तर आधुनिकतावाद

5. इतिहास के लिए कुछ और कार्य स्थगन प्रस्ताव !

6. फिलिस्तीनी मुुक्ति संघर्ष के विविध आयाम

7. एकता के प्रयास

अंक 5 जुलाई 2002

1. अंतराष्ट्रीय व राष्ट्रीय परिस्थिति का मूल्यांकन
2. राजनैतिक प्रस्ताव

3. सम्पादकीय की ऐवज में

4. सांगठनिक लाइन

अंक 4 अक्टूबर 2001

1. बुर्जुआ जनवादी क्रांति, नवजनवादी क्रांति और समाजवादी क्रांति एक ऐतिहासिक पुनरावलोकन

2. भारतीय क्रांति में धनी किसान राजनीतिक संश्रयकारी क्यों नहीं है ?

3. भारतीय कृषि: अर्द्ध – सामन्ती या पूंजीवादी?

4. भाकपा (माले) पीपुल्स वार: एक आलोचना

5. पुस्तक समीक्षा: Globalisation or Recolonsation ? साम्राज्यवाद की एक निम्न पूंजीवादी आलोचना

6. राजनीतिक टिप्पणियां

( नेपाल का सशक्त जनसंघर्ष जिन्दाबाद ! )

(11 सितम्बर के बाद: साम्राज्यवादी आक्रमण का विरोध करो !)

अंक 3 अप्रैल 2001

1. स्वछंद क्रांतिकारियों का विरोध करो

2. कम्युनिस्ट पार्टी- संगठनों के काम को सर्वहारा वर्ग में केन्द्रित करो !

3. राष्ट्रीय मुक्ति के सवाल पर कुछ बातें

4. भारतीय कृषि: अर्द्ध-सामन्ती या पूंजीवादी?

5. उत्तर आधुनिक कम्युनिस्ट: सुधरवादियों की नयी किस्म

6.तेल संकट, ओपेक और साम्राज्यवाद

अंक 2 अप्रैल 2000
1.मजदूर हड़तालों का सिलसिला – चुनौतियां और सम्भावनाएं
2.पूंजीपति वर्ग की क्रांतिकारिता के बारे में
3.पूंजी का वैश्वीकरण या साम्राज्यवाद की पैरोकारी
4.रेड फ्लैग के वैचारिक सयानेपन का जवाब
5.भाकपा (माले) रैड फलैग: विचारधरात्मक, राजनीतिक व सांगठनिक लाइन

6. श्रीलंका का तमिल संघर्ष: एक सर्वहारा दृष्टिकोण

अंक 1 जनवरी 2000

1. भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के सम्मुख मौजूद चुनौतियों पर चन्द बातें

2. भाकपा (माले) लिबरेशन: एक संशोधनवादी संगठन की विकास यात्रा

3. विचारधरा और विचारधरात्मक संघर्ष के महत्व के बारे में